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मुक्ति (Freedom) - V0
Member: rishi
Words: rishi

आकाश रिक्त है
इस रिक्तता को स्वयं में भर
सारा ब्रह्माण्ड तुझमे समा जायेगा |
फिर देख अपने अन्दर झाँक कर
तू स्वयं रिक्त हो जायेगा ||

अथाह समंदर की गहराई में बसे,
रज कड़ सामान इस अस्तित्व को, 
\"रचनाकार\" में विलीन होने दे |
फिर देख अपने अन्दर झाँक कर,
तेरा अहम् रिक्त हो जायेगा ||

खग रुपी इस मन को,
विचारो के पिंजरे में मत बाँध,
इसे मुक्त नभ में उड़ने दे |
फिर देख अपने अन्दर झाँक कर, 
तेरा मन रिक्त हो जायेगा ||

आकाश रिक्त है............